
नई दिल्ली – आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने ठाकुर विवाद मामले में गुरुवार को चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि मनोज झा विद्वान आदमी हैं। ठाकुर (राजपूत) समाज को निशाना नहीं बनाया गया है। वहीं, उन्होंने आनंद मोहन व उनके बेटे के बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर बिना उनका नाम लिए कहा कि उन्हें संयम बरतना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, महिला आरक्षण बिल पर सदन में बोलते हुए राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा था कि इस बिल को दया भाव के तौर पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि दया कभी भी अधिकार की श्रेणी में नहीं आ सकती। अंत में उन्होंने ओमप्रकाश वाल्मिकी की कविता पढ़ी और अंदर के ठाकुरों को मारने का आह्वान किया।
“चूल्हा मिट्टी का, मिट्टी तालाब की, तालाब ठाकुर का।
भूख रोटी की, रोटी बाजरे की, बाजरा खेत का, खेत ठाकुर का।
बैल ठाकुर का, हल ठाकुर का, हल की मूठ पर हथेली अपनी, फसल ठाकुर की।
कुआं ठाकुर का, पानी ठाकुर का, खेत-खलिहान ठाकुर के, गली-मोहल्ले ठाकुर के फिर अपना क्या?”
इस पोस्ट के बाद चेतन आनंद बुधवार सुबह फेसबुक पर लाइव हुए. उन्होंने कहा कि मनोज झा ठाकुरों को खलनायक बता रहे हैं। आपको ठाकुरों से एलर्जी है। दुनिया में बहुत सारी कविताएँ हैं, हम उनका उपयोग कर सकते थे। आप ब्राह्मण हैं इसलिए आपने ब्राह्मणों के विरुद्ध कविता नहीं पढ़ी। आपके लोग आपको जीने नहीं देते, इसीलिए आपने उनके खिलाफ कविता नहीं पढ़ी।




