वृक्षारोपण से बंजर ज़मीनों पर लौटी हरियाली, पर्यावरण बचाने में हर नागरिक निभा रहा अहम भूमिका

कानपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान ने बंजर जमीनों को हरे आवरण में बदल दिया है। कभी वीरान पड़ी ज़मीनों पर अब हवा में हरियाली की खुशबू घुल रही है। पेड़ों की कतारें लहराती हैं, पत्तों की सरसराहट में नई उम्मीद जगती है और हर कोना जैसे फिर से सांस लेने लगा है।

यह सकारात्मक परिवर्तन केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता का प्रतीक है। किसानों से लेकर बच्चों तक, हर किसी ने मिट्टी में जीवन रोपा है। यही कारण है कि अब वृक्षारोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बन गया है।
सरसौल में विकसित हुआ 40 हेक्टेयर का हरित क्षेत्र
वर्ष 2021 में कानपुर के सरसौल क्षेत्र स्थित डोमनपुर वन ब्लॉक की 40 हेक्टेयर भूमि पर अर्जुन, कंजी, अर्रु, अकेसिया और नीम जैसे पेड़ों का रोपण किया गया। विशेष बात यह रही कि इस कार्य में स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ-साथ उनकी देखरेख की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

आज इस क्षेत्र में 95.69% पौधे जीवित हैं। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय तापमान में संतुलन, पक्षियों की संख्या में वृद्धि और वायु की गुणवत्ता में सुधार देखा जा रहा है।
एनएसआई परिसर में मियावाकी पद्धति से विकसित घना जंगल
इसी प्रकार वर्ष 2021 में राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (NSI) परिसर में मियावाकी तकनीक से मात्र एक हेक्टेयर भूमि पर 35,000 से अधिक पौधे रोपे गए। महुआ, जामुन, शीशम, आम, इमली, नीम, बोगनबेलिया जैसे पौधों से सजा यह जंगल अब शहर के बीचोंबीच प्रकृति का सुकूनभरा स्थल बन चुका है।

यह जंगल न केवल जैव विविधता को समृद्ध कर रहा है, बल्कि बच्चों और युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी बना रहा है। इसके अलावा, शुद्ध हवा और ठंडी छाया जैसे प्राकृतिक लाभ भी मिल रहे हैं।
घाटमपुर में ऊसर ज़मीन पर उगा हरा आवरण
वर्ष 2024 में घाटमपुर स्थित नवेली पावर प्लांट परिसर की 50 हेक्टेयर ऊसर भूमि पर 1.25 लाख पौधे लगाए गए। देशी बबूल, सिरस और नीम जैसे पेड़ों का चयन कर यह सुनिश्चित किया गया कि कठोर और अनुपजाऊ भूमि पर भी हरियाली संभव हो सके।

यहां 97% से अधिक पौधों की सफलता दर ने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों और सही दिशा-निर्देशों से असंभव भी संभव हो सकता है। आज यह इलाका हरियाली की नई पहचान बन चुका है।
हरियाली के साथ विकसित हो रही पर्यावरण चेतना
इन तीनों स्थलों के अलावा भी जनपद के विभिन्न हिस्सों में और सड़कों के किनारे पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इससे न केवल हरियाली बढ़ी है बल्कि पर्यावरण के प्रति सोच और जागरूकता भी विकसित हुई है।

प्रभागीय वन अधिकारी दिव्या का कहना है कि जब हर नागरिक वृक्षों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी समझता है, तो वह अपने बच्चों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करता है।
9 जुलाई को होगा वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम
जनपद में आगामी 9 जुलाई को व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम एलन फॉरेस्ट में होगा, जहां सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्योग विभाग के मंत्री श्री राकेश सचान की अध्यक्षता में मियावाकी पद्धति से पौधारोपण किया जाएगा।

कार्यक्रम प्रातः 11:30 बजे आयोजित किया जाएगा। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने जनपदवासियों से अनुरोध किया है कि इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अवश्य लगाएं। यह केवल पर्यावरण रक्षा का कार्य नहीं, बल्कि हमारी अगली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।




