Land For Job Scam : CBI को लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की केंद्र सरकार से मिली अनुमति, लालू प्रसाद यादव की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

नई दिल्ली : राजद सुप्रीमों लालू यादव को मंगलवार (12 सितंबर) को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीबीआई को राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष के खिलाफ केस चलाने की अनुमति दे दी है। सीबीआई ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट को सूचित किया कि पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में एक ताजा आरोप पत्र के संबंध में गृह मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त कर ली गई है।
मामले की सुनवाई 21 सितंबर को सूचीबद्ध
सीबीआई ने बताया है कि हालांकि, उसे 3 रेलवे अधिकारियों के खिलाफ मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। सीबीआई ने कहा कि बाकी की मंजूरी एक हफ्ते के भीतर मिलने की उम्मीद है।
वहीं, मामले को 21 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
क्या हैं लालू पर आरोप
लालू प्रसाद पर आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच जब वह रेलमंत्री थे, तब उन्होंने रेलवे के ग्रुप डी में नौकरी देने के एवज में परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन ट्रांसफर कराकर आर्थिक लाभ उठाया। इसके एवज में रेलवे के अलग-अलग जोन के अंतर्गत मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में लोगों को नौकरी दी गई।
इस केस में आरोप यह भी है कि इन नौकरियों के बहालियों के लिए कोई भी विज्ञापन या पब्लिक नोटिस नहीं जारी किया गया। इस मामले में पिछले साल 18 मई को लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, मीसा भारती सहित 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी की गई थी।
नई चार्जशीट में तेजस्वी यादव भी आरोपित
जांच एजेंसी के वकील ने कहा कि कोर्ट में 21 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई होगी। वहीं, सीबीआइ ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले के मामले में बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को भी आरोपित बनाया है। नई चार्जशीट मे तेजस्वी का नाम पहली बार शामिल किया गया है।
नई चार्जशीट मे लालू यादव, रावडी देवी समेत 16 लोगों के नाम हैं। चार्जशीट मे रेलवे के अधिकारी और नौकरी लेने वालों के नाम शामिल हैं।
क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम?
- लैंड फॉर जॉब स्कैम का यह केस 14 साल पुराना है। उस वक्त लालू यादव रेल मंत्री थे। दावा है कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में लोगों को नौकरी देने के बदले उनकी जमीन लिखवा ली थी। बताते चलें कि लालू यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहे थे।
- सीबीआई ने इस मामले में 18 मई को केस दर्ज किया था। सीबीआई के मुताबिक, लोगों को पहले रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया और जब उनके परिवार ने जमीन का सौदा किया, तब उन्हें रेगुलर कर दिया गया।
- सीबीआई का कहना है कि पटना में लालू यादव के परिवार ने 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन पर कथित तौर पर कब्जा कर रखा है। इन जमीनों का सौदा नकद में हुआ था। यानी, लालू परिवार ने नकद देकर इन जमीनों को खरीदा था। सीबीआई के मुताबिक, ये जमीनें बेहद कम दामों में बेच दी गई थीं।
मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ED
रेलवे में नौकरी के बदले रिश्वत में जमीन लेने के आरोपों के मामले में सीबीआई जांच कर रही है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी जांच कर रही है। सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी। इस मामले में लालू यादव के करीबी व पूर्व विधायक भोला यादव और हृदयानंद चौधरी भी अभियुक्त हैं। आरजेडी नेता लालू यादव के ओएसडी रहे भोला यादव को सीबीआई ने 27 जुलाई को गिरफ्तार किया था। भोला 2004 से 2009 के बीच तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के ओएसडी थे।
इन मामलों में लालू और उनके परिवार पर केस
चारा घोटाला: 6 केस, 5 में सजा
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले में 6 केस CBI ने दर्ज किए थे। इसमें से 5 झारंखड में थे। पांचों मामले में उन्हें सजा हो चुकी है। डोरंडा कोषागार केस नंबर : आरसी 47-ए/96) मामले में पांच साल की कैद और 60 लाख रुपए के जुर्माने की सजा हुई थी। अभी वे जमानत पर बाहर हैं।
चारा घोटाले में उनके खिलाफ सिर्फ एक मामला लंबित है। इसकी सुनवाई बिहार की राजधानी पटना की CBI कोर्ट में चल रही है।
लैंड फॉर जॉब्स : रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने के मामले में लालू, राबड़ी, तेजस्वी समेत 16 पर CBI ने केस दर्ज किए हैं।
IRCTC घोटाला- लालू के रेल मंत्री रहते हुए रांची और पुरी के दो होटलों को प्राइवेट सेक्टर को देने में घोटाला सामने आया था। CBI ने 2017 में केस दर्ज किया था। इस मामले में लालू, तेजस्वी समेत परिवार के सदस्यों को आरोपी बनाया गया था। इसी मामले में ED ने 2018 में लालू और उनके परिवार पर मामला दर्ज किया था।
सुशील मोदी लगातार करते रहे हैं हमला
जमीन के बदले नौकरी के मामले में लगातार बीजेपी हमला करती है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी यह कह चुके हैं कि रेलवे की नौकरी के बदले जमीन मामले में संपत्ति जब्त करने की प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को बताना चाहिए कि आखिर वे लगभग 100 करोड़ की संपत्ति के मालिक कैसे बने? इस मामले में चुप्पी साधने के बजाय नीतीश कुमार को तेजस्वी यादव से बिंदुवार जवाब मांगना चाहिए। जेडीयू लालू परिवार पर ईडी और सीबीआई की कार्रवाई का विरोध केवल दिखावे के लिए कर रहा है।




