राजनीति

I.N.D.I.A. गठबंधन में फूट,गठबंधन की कैसे सुलझेगी गांठ?

नई दिल्ली – 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार से टक्कर लेने के लिए बनाए गए विपक्षी दलों के I.N.D.I.A. गठबंधन में फूट पड़ती हुई नजर आ रही है। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए साथ आए विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA में हर दिन नया कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है। सीट शेयरिंग से लेकर चुनावी मुद्दों तक में आपसी तालमेल का आभाव साफ दिखाई दे रहा है। यहां तक कि G-20 के सफल होने का सवाल पर भी INDIA गठबंधन बिखरा हुआ दिखाई पड़ता है। इतने सारे कन्फ्यूजन के बीच अब INDIA गठबंधन में नया रार देखने को मिला है। दरअसल सभी दलों के बीच तनातनी की नई वजह रैली के रूप में बाहर आई है।

सीट शेयरिंग से पहले ही रैली पर उलझी बात

इंडिया गठबंधन के दलों में सीट बंटवारा पहले ही समस्या बना हुआ है, सूत्रों के मुताबिक, उसके साथ ही अब दलों के बीच रैलियों की जगह को लेकर तनातनी उभर आई है। इसी के चलते गठबंधन की कैंपेन कमेटी की आज होने वाली बैठक टाल दी गई है। इंडिया गठबंधन की कैंपेन कमेटी की पहली बैठक में कांग्रेस की तरफ से प्रस्ताव आया था कि, शुरुआत में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, वहां की राजधानियों में इंडिया के नेताओं की सामूहिक रैलियां आयोजित की जाए। इसके साथ ही देश भर में संदेश देने के लिए राजधानी दिल्ली में भी सामूहिक रैली की जाए। सूत्रों का कहना है कि आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी समेत तमाम दलों को ये प्रस्ताव रास नहीं आ रहा है।

दलों को लग रहा पार्टी के वजूद खत्म होने का खतरा

दरअसल, आम आदमी पार्टी, दिल्ली, पंजाब के अलावा हरियाणा, एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान में विधानसभा चुनावों में दम ठोंक रही है। वहीं, सपा यूपी से सटे राजस्थान और एमपी में उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। ऐसे में चुनावी राज्य की राजधानी में बड़े दल कांग्रेस के साथ रैली में शामिल होने पर उनका वजूद खत्म होने का खतरा है। सूत्रों के मुताबिक, इन दलों का मानना है कि विधानसभा चुनावों में जब कोई समझौता नहीं है तो सब अलग अलग प्रचार करें, चुनाव लड़ें।

चुनाव के बाद साथ में रैली करने को तैयार सभी दल

विधानसभा चुनावों के बाद इन राज्यों में इंडिया की सामूहिक रैलियां हों। तब तक जहां विधानसभा चुनाव नहीं है, वहां रैलियां आयोजित हों। इसके अलावा इन दलों के साथ बाकी दलों को भी लगता है कि, सीटों का बंटवारा हुए बिना ऐसा करने का कांग्रेस फायदा उठा सकती है। विधानसभा चुनावी राज्यों में लोकसभा सीट दूसरे दलों को छोड़ने में आनाकानी कर सकती है। इसलिए सीट बंटवारे पर रुख साफ होने पर ही आगे बढ़ना चाहिए। इसी विवाद के चलते कैंपेन की आज होने वाली बैठक को ये कहकर टाल दिया गया कि,13 सितंबर को शरद पवार के घर पर सीट बंटवारे को लेकर होने वाली बैठक को पहले होने दिया जाए, उसके बाद उसके आधार पर कैम्पेन कमेटी की बैठक बुलाई जाए।

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