Elvish Yadav : एल्विश यादव केस में बड़ा अपडेट, नोयडा सेक्टर 49 थाने के SHO को किया गया लाइन हाजिर

नई दिल्ली – Elvish Yadav : उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए एल्विश यादव केस में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस प्रकरण में यूपी पुलिस के एक SHO को लाइन हाजिर कर दिया गया है। आरोप है कि SHO ने एल्विश मामले में लापरवाही बरती है। यही कारण है कि उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया है।
सेक्टर 49 थाने के SHO लाइन हाजिर
आपको बता दें कि यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ नोएडा के सेक्टर 49 थाने में रेव पार्टी करने, सांपों की तस्करी और सांप के जहर को नशे के तौर पर बेचने जैसी गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अब इस मामले में एक बड़ा अपडेट आया है। अपडेट ये है कि एल्विश यादव मामले में नोएडा सेक्टर 49 थाने के SHO संतोष चौधरी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। यह आदेश नोएडा पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह ने जारी किया है।
लखनऊ लैब में जहर की जांच
नोएडा में एक रेव पार्टी में सांप का जहर सप्लाई करने के आरोप में यूट्यूबर और बिग बॉस विजेता एल्विश यादव समेत 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। लखनऊ की लैब में नोएडा पुलिस द्वारा बरामद किए गए सांप के जहर की जांच की जा रही है।
कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
बता दें कि पिछले दिनों आगरा में गिरफ्तार किए आधा दर्जन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर एल्विश यादव के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अलावा आईपीसी की धारा 120बी के तहत भी मामला दर्ज किया है।
नोयडा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक, एल्विश यादव और उनके साथियों के खिलाफ रेव पार्टी करने का आरोप लगा है। इसके साथ ही इन पार्टियों में प्रतिबंधित सांपों के जहर के इस्तेमाल के साथ-साथ विदेशी लड़कियों को बुलाए जाने की बात भी कही गई है।
क्या कहता है कानून
वहीं, भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 428 और धारा 429 में कहा गया है कि किसी जानवर की हत्या और शिकार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके अलावा, किसी जानवर को अपंग बनाना, जहर देना या यातना देना एक संज्ञेय अपराध है। ऐसे मामले में अगर दोष सिद्ध होता है तो पांच साल की सजा या फिर जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है।
सांप एक संरक्षित वन्य प्राणी है
भारतीय कानून के तहत सांपों को संरक्षित जंगली जानवरों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न अनुसूचियों के तहत संरक्षित सांपों और उनके शरीर के अंगों का अवैध शिकार और जहर रखना अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध हैं। सज़ा की गंभीरता संरक्षित क्षेत्र के अंदर या बाहर अपराध के स्थान और इसमें शामिल साँप की प्रजाति पर निर्भर करती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के अनुसार, किसी भी जंगली जानवर को पकड़ना या पकड़ने का प्रयास करना अधिनियम की धारा 9 के तहत अपराध माना जाता है। एक्ट में सांपों की सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। सांपों को पकड़ना शिकार माना जाता है।




