नई दिल्ली। कांग्रेस के युवा संगठन इंडियन यूथ कांग्रेस में अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली में शामिल नहीं होने पर यूथ कांग्रेस ने 215 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश मध्य इकाई में की गई है।
संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस के युवा संगठन में हलचल मच गई है। निलंबित पदाधिकारियों से उनकी अनुपस्थिति को लेकर जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार, अनुशासनात्मक समीक्षा का दायरा बढ़ने पर कार्रवाई का आंकड़ा 500 तक पहुंच सकता है।
मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी कार्रवाई
यूथ कांग्रेस की ओर से की गई कार्रवाई में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। यहां 60 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा गुजरात में 49, झारखंड में 32, पश्चिम बंगाल में 26, तेलंगाना में 14, हिमाचल प्रदेश में 13, उत्तर प्रदेश मध्य इकाई में 11 और हरियाणा में 10 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और अगले आदेश तक जारी रहेगा।
15 साल पार्टी के लिए काम किया, फिर भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
कार्रवाई के बाद कुछ पदाधिकारियों ने संगठन के फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पार्टी के लिए वर्षों तक काम करने और आंदोलन के दौरान मुकदमों तथा जेल की कार्रवाई का सामना करने के बावजूद केवल एक कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने पर उनके खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई करना उचित नहीं है।
यूथ कांग्रेस के महासचिव रहे रोहित राजोरिया ने भी अपने पद से हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पार्टी के लिए लगभग 15 साल तक काम किया और विभिन्न आंदोलनों में हिस्सा लेने के कारण उनके खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज हुईं। इस दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
चाचा की तेरहवीं में शामिल होने के कारण नहीं पहुंचे दिल्ली
रोहित राजोरिया ने बताया कि उनके चाचा का निधन हो गया था और परिवार में तेरहवीं का कार्यक्रम था। उन्होंने दावा किया कि इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को पहले ही दे दी थी।
उनके मुताबिक, उन्होंने नेतृत्व को स्पष्ट कर दिया था कि पारिवारिक शोक के कारण वह 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी की रैली में शामिल नहीं हो सकेंगे।
इसके बावजूद उन्हें पद से हटा दिया गया। राजोरिया ने संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वर्षों की पार्टी सेवा और संघर्ष के बाद भी क्या किसी पदाधिकारी को केवल एक कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने के कारण हटाया जाना उचित है?
डिजिटल तरीके से रखी गई थी उपस्थिति पर नजर
रैली में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति दर्ज करने के लिए यूथ कांग्रेस ने डिजिटल व्यवस्था भी अपनाई थी। दिल्ली के मिंटो रोड पर बारकोड स्कैनर लगाए गए थे। इसके अलावा संगठन के आधिकारिक मोबाइल एप के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन कराया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 15 हजार लोगों के एकत्र होने का दावा किया गया, जबकि मोबाइल एप पर 2,831 लोगों का ही पंजीकरण दर्ज हुआ। संगठन ने अनुपस्थित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को अनुशासन से जोड़कर देखा है।
आठ संगठनात्मक इकाइयों में कार्रवाई
यूथ कांग्रेस की कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:
- मध्य प्रदेश – 60
- गुजरात – 49
- झारखंड – 32
- पश्चिम बंगाल – 26
- तेलंगाना – 14
- हिमाचल प्रदेश – 13
- उत्तर प्रदेश मध्य – 11
- हरियाणा – 10
कुल 215 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
अब कांग्रेस के भीतर उठ रहे हैं सवाल
एक तरफ यूथ कांग्रेस नेतृत्व संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ निलंबित पदाधिकारी पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अब देखना होगा कि निलंबित पदाधिकारी संगठन के फैसले को स्वीकार करते हैं या इस कार्रवाई के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हैं।




