Women Rights in India : जानें भारतीय कानून में महिलाओं को क्या मिले हैं अधिकार, हर नारी को जरूर होना चाहिए पता

नई दिल्ली – Women Rights in India : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, हर साल 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समानता की मांग को उजागर करने के लिए समर्पित है। इस दिन को मनाने की शुरुआत 1908 के बाद हुई, जब अमेरिका में मजदूर आंदोलन हुआ। इस आंदोलन में करीब 15 हजार महिलाएं न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की मांग करने लगीं। महिलाओं की मांग थी कि उनकी नौकरी के घंटे यानी कामकाज की समय अवधि कम की जाए और वेतनमान में बढ़ोतरी हो। साथ ही इस आंदोलन में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने की भी मांग की गई।
क्यों मनाते हैं?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समाज में समानता और अधिकार के साथ जीने का हक प्रदान करना है। भारत के कानून और संविधान में महिलाओं को पुरुषों के समान ही अधिकार मिले हैं। हालांकि बहुत सी भारतीय महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी न होने पर वह उत्पीड़न, असमानता और असुरक्षित जीवन जीती हैं।
भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।
इस श्लोक का मतलब है कि, जहां महिलाओं को पूजा जाता है, उस जगह देवता का निवास होता है। वहीं, जहां महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जाता है, वहां किए गए सभी कार्य सिद्ध नहीं होते हैं।
भारतीय संविधान के अनुसार
भारतीय संविधान अनुच्छेद 14 के अनुसार राज्य प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता एवं भारत के क्षेत्र में कानूनों का समान संरक्षण प्रदान करेगा। इसके अनुसरण, अनुच्छेद 15(3) राज्य के पास उचित वर्गीकरण के आधार पर महिलाओं को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय से सशक्त करने के लिए कानून बनाने का अधिकार है।
इसी अनुच्छेद के अंतर्गत कानूनी शक्ति का उपयोग करते हुए राज्य ने निम्नलिखित कानून बनाए हैं, जो महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देते हैं और महिलाओं को ताकतवर बनाने में मदद करते हैं।
भारतीय दंड संहिता, 1860
यह संहिता महिलाओं के अधिकार के संरक्षण के उद्देश्य के लिए महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल, यौन उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न, महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का उपयोग, दृश्यरतिकता,पीछा करना, अपहरण, व्यपहरण शब्द, इशारा या कार्य जिसका उद्देश्य किसी महिला की गरिमा का अपमान करना और बलात्संग जैसे अपराधों के लिए कठोर दंड के प्रावधान प्रदान करता है।
स्वामी विवेकानंद ने एक बार ये कहा था कि जब तक महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं होगा तब तक विश्व के कल्याण की कोई संभावना नहीं है। किसी पक्षी के लिए केवल एक पंख पर उड़ना संभव नहीं है। ये कानून महिलाओं को सशक्त बनाते हैं, जिससे सृष्टि का कल्याण हो सके और भारत अपने दोनों पंखों के साथ ऊँची उड़ान के लिए अग्रसर हो सके। महिलाओं के इन कानूनों के बारे में जरूर पता होना चाहिए।
महिलाओं को इन अधिकार के बारे में पता होना चाहिए
समान वेतन का अधिकार
भारतीय कानून में महिलाओं को अलग-अलग अधिकार मिले हैं। इसमें से एक है समान वेतन का अधिकार। मेहनताने की बात हो तो जेंडर के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते। किसी कामकाजी महिला को पुरुष की बराबरी में सैलरी लेने का अधिकार है।
गरिमा और शालीनता का अधिकार
महिला को गरिमा और शालीनता से जीने का अधिकार मिला है। मेडिकल परीक्षण के दौरान महिला की मौजूदगी जरूरी है।
दफ्तर या कार्यस्थल पर उत्पीड़न से सुरक्षा
यदि किसी महिला के खिलाफ दफ्तर में या कार्यस्थल पर शारीरिक उत्पीड़न या यौन उत्पीड़न होता है, तो उसे शिकायत दर्ज करने का अधिकार है।
घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार
भारतीय संविधान की धारा 498 के अंतर्गत पत्नी, महिला लिव-इन पार्टनर या किसी घर में रहने वाली महिला को घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार मिला है। पति, मेल लिव इन पार्टनर या रिश्तेदार अपने परिवार के महिलाओं के खिलाफ जुबानी, आर्थिक, जज्बाती या यौन हिंसा नहीं कर सकते।
पहचान छिपाने का अधिकार
किसी महिला की निजता की सुरक्षा का अधिकार हमारे कानून में दर्ज है। यदि कोई महिला यौन उत्पीड़न का शिकार हुई है तो वह अकेले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करा सकती है।
मुफ्त कानूनी मदद पाने का अधिकार
लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट के मुताबिक रेप की शिकार महिला को मुफ्त कानूनी सलाह पाने का अधिकार है।
रात में महिला को नहीं कर सकते गिरफ्तार
किसी महिला आरोपी को सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। किसी से यदि उसके घर में पूछताछ कर रहे हैं तो यह काम महिला कांस्टेबल या परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में होना चाहिए।
वर्चुअल शिकायत दर्ज करने का अधिकार
कोई भी महिला वर्चुअल तरीके से अपनी शिकायत दर्ज कर सकती है। इसमें वह ई-मेल का सहारा ले सकती है। महिला चाहे तो रजिस्टर्ड पोस्टल एड्रेस के साथ पुलिस थाने में चिट्ठी के जरिए अपनी शिकायत भेज सकती है।
अशोभनीय भाषा का नहीं कर सकते इस्तेमाल
किसी महिला (उसके रूप या शरीर के किसी अंग) को किसी भी तरह से अशोभनीय, अपमानजनक या नैतिकता को भ्रष्ट करने वाले रूप में प्रदर्शित नहीं कर सकते। ऐसा करना दंडनीय अपराध है।
महिला का पीछा नहीं कर सकते
आईपीसी की धारा 354D के तहत वैसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी जो किसी महिला का पीछा करे, बार-बार मना करने के बावजूद संपर्क करने की कोशिश करे या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन जैसे इंटरनेट, ई-मेल के जरिए मॉनिटर करने की कोशिश करे।
जीरो एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार
किसी महिला के खिलाफ यदि अपराध होता है तो वह किसी भी थाने में या कहीं से भी एफआईआर दर्ज करा सकती है। इसके लिए जरूरी नहीं कि केस उसी थाने में दर्ज हो जहां घटना हुई है। जीरो एफआईआर को बाद में उस थाने में भेज दिया जाएगा जहां हुआ हो।
मैटरनिटी लाभ अधिनियम, 1861
यह अधिनियम महिलाओं के रोजगार और कानून द्वारा अनिवार्य मातृत्व लाभ को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत हर कामकाजी महिला को छह महीने के लिए मैटरनिटी लीव मिलती है। इस दौरान महिलाएं पूरी सैलरी पाने की हकदार होती हैं। यह कानून हर सरकारी और गैर सरकारी कंपनी पर लागू होता है। इसमें कहा गया है कि एक महिला कर्मचारी जिसने एक कंपनी में प्रेग्नेंसी से पहले 12 महीनों के दौरान कम से कम 80 दिनों तक काम किया है, वह मैटरनिटी बेनेफिट पाने की हकदार है। जिसमें मैटरनिटी लीव, नर्सिंग ब्रेक, चिकित्सा भत्ता आदि शामिल हैं।




