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लोन ईएमआई का कम होगा बोझ, आरबीआई ने जारी की गाइडलाइंस

नई दिल्ली – कोविड के बाद से जिस तरह से देश में महंगाई बढ़ी और उसे कम करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ब्याज दरों को बढ़ाना शुरू किया उससे आम लोगों की कमर टूट गई है। पुराने चलते आ रहे लोन की लगातार ईएमआई बढ़ने की वजह से आम लोगों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। जिसकी शिकायत लगातार आरबीआई तक भी पहुंच रही थी। अब इस बोझ को करने के लिए आरबीआई ने नई गाइडलाइंस तैयार की है। आरबीआई ने बैंकों और एनबीएफसी के साथ दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से कहा है कि ब्याज दरों को नए सिरे से तय करते समय में कर्जदारों को फिक्स्ड रेट चुनने का ऑप्शन जरूर दें।

आरबीआई ने जारी किया नोटिफिकेशन

आरबीआई ने शुक्रवार एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन में सेंट्रल बैंक ने कहा है कि ऐसा देखने में आया है कि ब्याज दर बढ़ने पर कर्ज की अवधि या मासिक किस्त यानी ईएमआई बढ़ा दी जाती है और कस्टमर्स को इसके बारे में सही तरीके से सूचित नहीं किया जाता है और न ही उनकी सहमति ली जाती है। इस चिंता को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक ने अपने रेगुलेशन के दायरे में आने वाली यूनिट्स को एक उचित पॉलिसी फ्रेमवर्क बनाने को कहा है।

बैंकों को देने होंगे सभी तरह के ऑप्शन

आरबीआई ने कहा कि कर्ज की मंजूरी के समय बैंकों को अपने कस्टमर्स को स्पष्ट तौर पर बताना चाहिए कि स्टैंडर्ड इंट्रस्ट रेट में बदलाव की स्थिति में ईएमआई या कर्ज की अवधि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ईएमआई या कर्ज की अवधि बढ़ने की सूचना उचित माध्यम से तत्काल कस्टमर्स को दी जानी चाहिए। सेंट्रल बैंक ने कहा कि ब्याज दरों को नए सिरे से तय करते समय बैंक कस्टमर्स को फिक्स्ड इंट्रस्ट रेट चुनने का ऑप्शन दें। इसके अलावा पॉलिसी के तहत कस्टमर्स को यह भी बताया जाए कि उन्हें कर्ज की अवधि के दौरान इस ऑप्शन को चुनने का अवसर कितनी बार मिलेगा। साथ ही कर्ज लेने वाले कस्टमर्स को ईएमआई या लोन का टेन्योर बढ़ाने या दोनों ऑप्शन दिए जाएं।

एमपीसी में आरबीआई गवर्नर ने की थी घोषणा

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कस्टमर्स को समय से पहले पूरे या आंशिक रूप से कर्ज के भुगतान की अनुमति दी जाए। यह सुविधा उन्हें कर्ज के टेन्योर के दौरान किसी भी समय मिलनी चाहिए। आरबीआई ने पिछले सप्ताह मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में कर्ज लेने वाले लोगों को फ्लोटिंग ब्याज दर से फिक्स्ड ब्याज दर का विकल्प चुनने की अनुमति देने की बात कही थी। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि इसके लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। इसके तहत बैंकों को कर्ज लेने वाले कस्टमर्स को लोन के टेन्योर और ईएमआई के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी।

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