Pitradosh : अगर आपके जीवन में भी बनी रहती हैं ये समस्याएं तो समझ लें पितृदोष से पीड़ित हैं आप?

नई दिल्ली – Pitradosh : जब किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृदोष होता है तो उसे पूरे जीवनभर परेशानियों से जूझना पड़ता है। पितृदोष लगने के कई सारे कारण होते हैं। कुछ मामलों में तो यह दोष उस व्यक्ति के स्वयं के कर्मों से बनता है और अधिकतर मामलों में वह जिस परिवार में पैदा होता है, वहां पर दिए गए पूर्वजों से श्राप के कारण भी लगता है। इसको कुंडली देखकर या लक्षणों से पहचाना जा सकता है।
कुंडली में कैसे बनता है पितृदोष?

ज्योतिष के अनुसार, जबा किसी व्यक्ति की कुंडली में लग्न भाव और पांचवें भाव में सूर्य, मंगल और शनि विराजमान होते हैं तो पितृदोष बनता है। इसके अलावा भी कुंडली के अष्टम भाव में गुरु और राहु एक साथ आकर बैठते हैं, तो भी इस दोष का निर्माण होता है।
जब कुंडली में राहु केंद्र में या त्रिकोण में मौजूद होता है, तब भी पितृदोष लगता है। इसके अलावा जह सूर्य, चंद्रमा और लग्नेश का राहु से संबंध होता है तो भी पितृदोष लगता है। इसके अलावा बड़ों के अनादर या फिर हत्या करने वाले व्यक्ति को भी पितृदोष का सामना करना पड़ता है।
पितृदोष के क्या लक्षण होते हैं?

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृदोष होता है तो ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं।
1- विवाह देरी से होता है या फिर बार-बार टूट जाता है। वैवाहित जीवन में लगातार तनाव बना रहता है।
2- पितृदोष से पीड़ित महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाती है।
3- जीवन मे कर्ज और नौकरी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
4- घर या फिर परिवार में अकस्मिक निधन अथवा दुर्घटना देखने को मिलती है।
5- परिवार में विकलांग बच्चे का जन्म हो सकता है। व्यक्ति गलत आदतों का शिकार हो सकता है। इसके साथ ही घर का कोई न कोई सदस्य बीमार बना रहता है।
इन सभी कारणों के अलावा जीवन में लगातार परेशानियाों का बना रहना भी पितृदोष का लक्षण हो सकता है।
इन कर्मों से भी लगता है पितृदोष

1- मृत्यु के बाद अगर किसी का विधि-विधान से अंतिम संस्कार न कराया जाए तो पितृदोष लगता है।
2- असामयिक मृत्यु की स्थिति में परिवार के सदस्यों को कई पीढ़ियों तक पितृदोष का सामना करना पड़ता है।
3- माता-पिता का अपमान करने और उनकी मृत्यु के बाद परिवार के सदस्यों का पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध न करने से पूरे परिवार पर पितृदोष लगता है।
4- सांप मारने के कारण भी पितृदोष लग जाता है।
5- पितरों का श्राद्ध न करने और पीपल, नीम, बरगद का पेड़ काटने से भी पितृदोष का सामना करना पड़ सकता है।
पितृदोष से मुक्ति के लिए कर सकते हैं ये उपाय

1- पितृपक्ष के दौरान पितरों के निमित्त विधि विधान से तर्पण व श्राद्ध करें. ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें। इसके साथ ही वर्ष की एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या पर पितरों को जल तर्पण करें और त्रिपिंडी श्राद्ध करें।
2- पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रतिदिन दोपहर के समय पीपल के पेड़ का पूजन करें।
3- पितृ को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ में जल के अंदर काले तिल, दूध, अक्षत मिलाकर अर्पित करें। इसके साथ ही पुष्प भी चढ़ाएं।
4- पितृपक्ष में रोज शाम को घर की दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जलाएं।
5- किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने, दान देने, या किसी गरीब कन्या की शादी में मदद करने पितृ प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से पितृदोष शांत होता है।
6- घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों की तस्वीरें लगाने और उनसे प्रतिदिन अपनी गलतियों की क्षमा मांगने से भी पितृदोष का प्रभाव कम होने लगता है।
Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। republicnow.in इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें।




