Live-in-Relationship Law : किस उम्र की गर्लफ्रेंड के साथ लिव इन में रह सकता है लड़का? जान लें कोर्ट की यह व्यवस्था

नई दिल्ली – Live-in-Relationship Law : बिना शादी किए एक छत के नीचे रहने का चलन बड़ी तेजी से बढ़ा है। यही लिव इन रिलेशनशिप है यानी साथ में रहना। पुराने जमाने की सोच वालों को भले ही यह नागवार गुजरे, लेकिन युवाओं को यह खूब भा रहा है। धीरे-धीरे यह लिव इन शादीशुदा लोगों पर भी हावी होने लगा है। शादीशुदा लोग भी पत्नी के रहते हुए गैर महिला के साथ लिव इन में रह रहे हैं।
लड़की होनी चाहिए 18 वर्ष की
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन को लेकर ऐसी व्यवस्था दी है, जिसके तहत एक लड़का बालिग और उसकी उम्र 21 वर्ष से कम हो तो भी वह अपनी गर्लफ्रेंड (युवती मित्र) के साथ रह सकता है। इसमें शर्त यह है कि लड़की बालिग यानी उसकी उम्र 18 वर्ष की हर हाल में होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि दो बालिग लड़का और लड़की अगर शादी की उम्र में नहीं है तो वह अपनी मर्जी से बिना शादी किए लिव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। कोर्ट ने दी व्यवस्था में यह भी स्वीकार किया है कि विधायिका भी लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता देती है। इसे अब स्वीकार्य किया जाने लगा है।
क्या है लिव इन रिलेशनशिप
लिव-इन रिलेशनशिप वह व्यवस्था है, जिसमें दो बालिग (महिला-पुरुष) एक ही छत के नीचे रहते हैं। सिर्फ शादी नहीं होती है, लेकिन वह वैवाहिक जीवन का आनंद लेते हैं। यहां तक कि महिला और पुरुष एक पति-पत्नी की तरह आपस में शारीरिक रिश्ता भी बनाते है। माना जाता है कि यह स्नेहात्मक होता है और रिश्ता गहरा होता है। उच्च वर्ग से शुरू हुआ लिव इन अब मध्य वर्ग में भी जगह बनाता जा रहा है।
यह है पूरा मामला
केरल हाई कोर्ट ने लड़की के पिता की उस अर्जी को मंजूर कर लिया था, जिसमें लड़के की उम्र 21 साल से कम होने के कारण हवाला दिया गया था। इसके बाद लड़की को पिता की कस्टडी में भेज दिया था। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने लड़के की अर्जी स्वीकार करते हुए केरल हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। इसके साथ ही व्यवस्था दी है कि लड़की 18 साल से ज्यादा है तो वह बालिग है और वह अपनी मर्जी से जहां चाहे रह सकती है। लड़की ने कोर्ट में स्वीकार किया था कि वह लड़के के साथ अपनी मर्जी से लिव इन में रहना चाहती है।




