
उज्जैन, मध्यप्रदेश : अगर कोई भगवान श्रीगणेश को ‘चोर गणेश’ कहे, तो पहली बार सुनकर जरूर अचरज हो सकता है, लेकिन यह नाम आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है। उज्जैन के मंगलनाथ क्षेत्र में स्थित यह मंदिर भगवान गणेश के उस स्वरूप को समर्पित है, जिसे लोग श्रद्धा से ‘चोर गणेश’ कहते हैं।

यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसके पीछे की किवदंतियां भी इसे विशेष बनाती हैं। मंदिर का मूल नाम ‘दुर्मुख गणेश मंदिर’ है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण के अवंतिकांड में भी मिलता है।
क्यों कहलाते हैं ‘चोर गणेश’?
इस मंदिर को लेकर दो प्रमुख लोककथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कोई वस्तु चोरी हो जाए या खो जाए, तो वह व्यक्ति यहां भगवान चोर गणेश के दरबार में अर्जी लगाता है। भक्तों का मानना है कि श्रीगणेश की कृपा से गुमशुदा वस्तु मिल जाती है।

दूसरी कथा थोड़ी रोचक है। कहा जाता है कि पुराने समय में कुछ चोर चोरी के बाद माल का बंटवारा इसी मंदिर में करते थे। जो माल बच जाता था, उसे वे भगवान गणेश को अर्पित कर देते थे। यही नहीं, चोरी पर जाने से पहले वे भगवान को ‘हिस्सा देने’ का वादा भी करते थे।

इन्हीं कहानियों के चलते इस मंदिर में विराजमान गणेश प्रतिमा को ‘चोर गणेश’ कहा जाने लगा। हालांकि, आज यहां केवल श्रद्धा और विश्वास का माहौल है।
भक्तों की गहरी आस्था और भीड़
विशेष पर्वों और बुधवार के दिन यहां भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु भगवान से अपने खोए सामान की वापसी के लिए प्रार्थना करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाकर धन्यवाद भी करते हैं।

कैसे पहुंचें चोर गणेश मंदिर उज्जैन?
- सड़क मार्ग: उज्जैन शहर सड़क मार्ग से भली-भांति जुड़ा हुआ है। रामजनार्दन मंदिर मार्ग स्थित यह मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- रेल मार्ग: उज्जैन रेलवे स्टेशन पर देशभर से कई प्रमुख ट्रेनों का ठहराव होता है।
- हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा इंदौर स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो उज्जैन से लगभग 56 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या बस के माध्यम से एक घंटे में मंदिर पहुंचा जा सकता है।




