
पटना : बिहार में शीतकालीन विधानसभा सत्र के दूसरे दिन जातिगत जनगणना (Caste Census) के आधार पर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। नीतीश कुमार ने कहा कि ‘बिहार में सभी वर्गों में गरीब लोग पाए गए हैं। सामान्य वर्ग में 25.09 फीसद परिवार गरीब हैं।’ ऐसे में गरीब लोगों की मदद करने के लिए सीएम ने दो लाख तक की राशि हर परिवार को देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि, जमीन के लिए सरकार एक लाख रुपये देगी। और घर बनाने के लिए 1.30 लाख रुपये दिए जाएंग
कास्ट सर्वे के बाद ‘आरक्षण दांव’
नीतीश कुमार ने कहा कि अगर केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे देती है, तो दो लाख की मदद करने का जो फैसला लिया गया है उस पर काम जल्दी भी हो जाएगा। वहीं उन्होंने आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से खत्म कर 65 प्रतिशत कर दिया है। इस आरक्षण में कमजोर आर्थिक वर्ग के लोगों को मिलने वाला 10% का आरक्षण 65 प्रतिशत से अलग होगा। उन्होंने बताया कि 75 प्रतिशत आरक्षण को कैबिनेट से भी पास करा लिया गया। नीतीश कुमार के इस ऐलान का बीजेपी ने समर्थन किया और कहा कि पंचायत और नगर निकाय में भी इसे 37 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की जरूरत है।
‘बिहार में महिलाएं अशिक्षित हैं’- नीतीश कुमार
एक तरफ जहां मुख्यमंत्री ने राज्य में कई बड़ी घोषणाएं की। वहीं, उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिस पर विवाद हो गया है। उन्होंने सदन में यह कहा कि बिहार में जनसंख्या नियंत्रण में कोई कमी नहीं आएगी क्योंकि पुरुष जिम्मेदारी नहीं लेते जबकि महिलाएं अशिक्षित हैं। नीतीश कुमार ने आगे कहा कि हमें पता था कि वह आदमी सारी जिम्मेदारी नहीं लेगा। इसलिए, वे महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं लेकर आए। लड़कियों को शिक्षित करने का काम किया ताकि वे जागरूक हो सकें।
आखिर क्या बोल गए नीतीश?
विधानसभा में बोलते हुए सीएम नीतीश कुमार ने बताया कि, कैसे बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कर लिया गया है। नीतीश कुमार ने कहा कि, ‘हम लोगों ने कहा कि जब पढ़ लेगी लड़की तो जो पुरूष है, जब शादी होती है तो रोज रात में उसके साथ…. है न। उसी में और पैदा हो जाता है। अगर लड़की पढ़ लेती है तो हमको मालूम है कि पुरूष… ठीक है। लेकिन लड़की कहेगी कि अंतिम में… बाहर कर दो। पुरूष… तो है लेकिन अब जनसंख्या घट रही है।’




