यूपीराजनीति

कल्याण सिंह के बहाने बीजेपी करेगी सपा पर वार, OBC को बनाएगी हथियार

लखनऊ – उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बहाने बीजेपी सूबे में मिशन-2024 का आगाज कर रही है। कल्याण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर सोमवार को अलीगढ़ में बीजेपी एक बड़ा कार्यक्रम कर रही थी, जिसमें पार्टी के तमाम दिग्गज नेता शिरकत की थी। कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को बीजेपी ‘हिंदू गौरव दिवस’ के रूप में मना रही है, जिसके जरिए यूपी की सियासत में हिंदुत्व की पॉलिटिक्स को धार देने और ओबीसी समीकरण को मजबूत करने की स्टैटेजी देखने को मिली।

कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर हो रहे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल हुए। साथ ही केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, यूपी संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और पीयूष गोयल भी शामिल हुए। राज्य सरकार के लगभग दो दर्जन मंत्री श्रद्धांजलि देने अलीगढ़ पहुंचें। इस दौरान अमित शाह से लेकर सीएम योगी सहित बीजेपी के दिग्गज नेता अलीगढ़ में दो घंटे तक रहकर कल्याण सिंह के बहाने उत्तर प्रदेश में एक तरह से मिशन 2024 का आगाज कर दिया है।

लोधी समुदाय का राजनीतिक उत्थान

बीजेपी शुरुआती दौर में ऊंची जातियों की राजनीति वाली पार्टी की पहचान रखती थी और उसे ठाकुर, ब्राह्मण, बनियों की पार्टी कहा जाता था। बीजेपी की इस छवि को बदलने का काम कल्याण सिंह ने किया था। तब गुड गवर्नेंस के जरिए उन्होंने तमाम ओबीसी जातियों को जोड़कर मंडल वाली सियासत पर कमंडल का पानी फेर दिया। कल्याण सिंह ओबीसी के लोध बिरादरी से थे और उत्तर प्रदेश में लोध समाज का वोट भी निर्णायक ओबीसी में एक और बड़ा वोट बैंक लोध जाति का है।

कल्याण सिंह के चलते लोधी समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर्स माने जाते हैं। पहले कल्याण सिंह और अब उनके पुत्र राजवीर सिंह सांसद और उनके पौत्र (राजवीर सिंह के बेटे) संदीप सिंह योगी सरकार में मंत्री हैं। इतना ही नहीं बीजेपी ने लोधी समुदाय के नेताओं को राज्यसभा और विधायक बना रखा है, लेकिन 2024 की चुनावी तपिश के साथ पार्टी कल्याण सिंह के जरिए लोधी ही नहीं बल्कि गैर-यादव ओबीसी वोटों को सियासी संदेश देने की कवायद शुरू कर रही है ताकि 2019 में हारी हुई सीटों को फतह किया जा सके।

उत्तर प्रदेश में चल रही ओबीसी पॉलिटिक्स की रणनीति

उत्तर प्रदेश की सियासत ओबीसी मतदाताओं के इर्द-गिर्द सिमट गई है, जिसके चलते कल्याण सिंह के बहाने बीजेपी लोधी समुदाय के साथ ओबीसी को मजबूती के साथ जोड़े रखने की रणनीति है। यूपी में सवर्ण 19 फीसदी तो ओबीसी 54 फीसदी है। यूपी के सवर्ण जातियां में ब्राह्मण 8 फीसदी, राजपूत 6 फीसदी बाकी वैश्य, भूमिहार और कायस्थ हैं. पिछड़े वर्ग की संख्या 54 फीसदी से ज्यादा है, जिसमें यादव 10 फीसदी, कुर्मी-कुशवाहा, सैंथवार 12 फीसदी, जाट 3 फीसदी, लोध 3 फीसदी, मल्लाह 5 फीसदी, विश्वकर्मा 2 फीसदी और अन्य पिछड़ी जातियों की तादाद 7 फीसदी है। इसके अलावा प्रदेश में अनुसूचित जाति 22 फीसदी हैं और मुस्लिम आबादी 20 फीसदी है।

यूपी के पिछड़े वोट बैंक में सबसे बड़ा हिस्सा गैर-यादव ओबीसी जातियों का है, जो फिलहाल सबसे अहम माने जा रहे हैं। यह वोटबैंक कभी किसी पार्टी के साथ स्थायी रूप से नहीं खड़ा नजर नहीं आया। बीजेपी इस वोटबैंक के सहारे सपा को सत्ता से बाहर कर अपना सियासी वनवास यूपी में खत्म किया है और लगातार जीत दर्ज कर रही है। कल्याण सिंह के कद का बीजेपी में इस समय न तो कोई लोध समुदाय का नेता है और न ही ओबीसी नेता है। ऐसे में बीजेपी कल्याण सिंह के बहाने हिंदुत्व को धार और अपनी सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने की कवायद है।

उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में लोधी वोटरों का है दबदबा

यूपी में करीब 3 फीसदी लोधी समुदाय के लोग हैं, लेकिन बृज और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में निर्णायक भूमिका में है। यूपी के लगभग 23 जनपदों में लोध वोटरों का दबदबा है। रामपुर, ज्योतिबा फुले नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, महामायानगर, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, पीलीभीत, लखीमपुर, उन्नाव, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा ऐसे जिले हैं, जहां लोध वोट बैंक पांच से 10 फीसदी तक है। लोधी समुदाय ओबीसी की पहली जाति है, जो कल्याण सिंह के चलते बीजेपी के साथ जुड़ गई थी। बीजेपी अब कल्याण सिंह के निधन के बाद भी उसे अपने साथ पहले की तरह ही जोड़े रखना चाहती है।

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